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शारदा बालग्राम : एक संक्षिप्त परिचय

शारदा बालग्राम रामकृष्ण मिशन आश्रम के अंतर्गत संचालित संस्था है जो कि मध्यप्रदेश राज्य के ग्वालियर जिले में सचिन तेंदुलकर मार्ग, सिटी सेन्टर स्थित है।
रामकृष्ण मिशन आश्रम एक सर्वविदित अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जिसके तहत ग्वालियर जिले में इसकी स्थापना आज से 57 वर्ष पूर्व 2अक्टूबर 1959 हुई थी। रामकृष्ण मिशन आश्रम, ग्वालियर के तत्वाधान में कक्षा 1 से 12 तक अंग्रेजी माध्यम का विद्यालय जो कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल, नईदिल्ली से मान्यता प्राप्त है, का सफल संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मानसिक रूप से दिव्यांग एवं स्नायविक असमर्थताओं के प्रभाव से ग्रस्त बच्चों एवं वयस्क व्यक्तियों तथा उनके अभिभावकों को प्रशिक्षण सेवा उपलब्ध कराये जाने के उददेश्य से रोशनी संस्था का संचालन भी आश्रम में वर्ष 1998 से निरन्तर किया जा रहा हैजिसमें दिव्यांग बालक/बालिकाओं को प्राथमिक शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाती है ताकि ऐसे दिव्यांग बच्चों की क्षमता का अधिकतम विकास हो सके एवं वे समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर अर्थपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। इसके अतिरिक्त रामकृष्ण मिशन आश्रम परिसर में ही स्वतन्त्र भवन में सारदा नाद मंदिर नाम से संगीत महाविद्यालय दिनांक 20सितम्बर 1984 से स्थापित किया गया है जिसमें गायन, वादन, तबला, सितार, वॉयलिन, कैसियो, आदि एवं शास्त्रीय नृत्यों का विधिवत प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। आश्रम में स्वामी रामकृष्ण परमहंस का भव्य मंदिर व प्रार्थना गृह स्थापित है जिसमें प्रतिदिन सांयकाल को ध्यान योग एवं प्रार्थना सभा का आयोजन होता है।

रामकृष्ण मिशन आश्रम परिसर में अंचल के निर्धन व जरूरतमंद व्यक्तियों को निःशुल्क चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के उददेश्य से निःशुल्क धर्मार्थ औषधालय 22जनवरी 1966 से स्थापित किया गया है जिसमें प्रतिदिन अंचल के निर्धन व जरूरतमंद निःशुल्क उपचार प्राप्त करते हैं। आश्रम में ही पुस्तकालय व वाचनालय भी वर्ष 1960 से स्थापित है जिसमें समस्त हिन्दी व अंग्रेजी समाचार पत्रों व दुर्लभ साहित्य तथा पाण्डुलिपियां, धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व साहित्यिक आदि विविध ज्ञानवर्धक पुस्तकों का भण्डार है जिसमें प्रतिदिन अंचल के प्रबुद्धजन आकर निःशुल्क पठन लाभ प्राप्त करते हैं।

रामकृष्ण मिशन आश्रम के अंतर्गत ही संचालित शारदा बालग्राम नामक संस्था हेतु म.प्र.शासन द्वारा सन् 1990 में भूमि आवंटित की गई थी जिसके पश्चात दिनांक 26 मार्च 1992 को तत्कालीन मुख्यमंत्री म.प्र.शासन माननीय श्री सुन्दर लाल पटवा द्वारा शिलान्यास किया गया। शारदा बालग्राम कुल 104बीघा (50एकड़) क्षेत्रफल में विस्तारित है जो कि ग्वालियर शहर के दक्षिण पूर्व भाग के दक्षिणी भाग में स्थित होकर शहरी आबादी के बीचों बीच किन्तु शहरी प्रदूषण के दोषो से मुक्त एक सुरम्य पहाड़ी स्थान है।

शारदा बालग्राम एक अत्यन्त रमणीक, मनोहारी, प्राकृतिक स्थान के रूप में विकसित है जिसमें लगभग 20 से 25 एकड़ कृषि योग्य भूमि है। साथ ही बालग्राम में चहुंओर लगभग समस्त प्रजाति के फलदार एवं औषधीय वृक्ष तथा वनस्पतिक पौधे एवं वृक्ष भी स्थित हैं। बालग्राम में लगभग 150 निराश्रित बालक एवं बालिकाओं के निवास हेतु कुटीर स्थापित किये गये हैं जिसके तहत 100 बालकों के निवास के लिये 10कुटीर एवं 50बालिकाओं के निवास हेतु 03 कुटीर स्थापित हैं जिनमे उनके रहने के लिये उत्तम व्यवस्था है। उक्त बालक/बालिकाओं के भोजन, आदि की व्यवस्था हेतु बालग्राम में ही स्वामी प्रेमानन्द भवन के नाम से 500व्यक्तियों की क्षमता वाला रसोईघर स्थापित है जहां प्रतिदिन उक्त बालक/बालिकाओं के लिये प्राकृतिक तरीके से भोजन निर्मित किया जाता है। शारदा बालग्राम में निवासित निराश्रित बालक/बालिकाओं को चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान की जाती है जिस हेतु परिसर में ही कक्षा 1 से 12 तक म.प्र.माध्यमिक शिक्षा मण्डल से मान्यता प्राप्त विद्यालय का सफल संचालन किया जा रहा है जिसमें निराश्रित बालक/बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। साथ ही गणवेश व अन्य आवश्यकतानुसार सामग्री का वितरण भी निःशुल्क किया जाता है। वर्तमान में शारदा बालग्राम के अंतर्गत स्वामी सुप्रदिप्तानंद जी के कुशल मार्गदर्शन एवं नेत्त्व में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं जिनमें कृषिकर्म, मशरूम उत्पादन, राखाल गौशाला का संचालन, जीवामृत का उत्पादन, केंचुआ खाद प्रकल्प का उत्पादन, मधुमक्खी पालन, दूषित जल उपचार संयत्र की स्थापना, गोबर गैस संयंत्र की स्थापना, पंचगव्य चिकित्सालय की स्थापना, आयुष केन्द्र की स्थापना, बालक/बालिकाओं को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने की दिशा में टाटा क्लास ऐज की स्थापना, आदि, गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर ज्ञान आधारित कार्यशालाओं व सेमीनार आदि का आयोजन कर नवीनतम तकनीकों से परिचित कराया जाता है जिसके तहत वर्तमान में योगा दिवस पर विशाल योगा शिविर का आयोजन किया गया है जिसमें अंचल के 15 शासकीय/अशासकीय विद्यालयों व जनसमूह की भागीदारी रही। इसके अतिरिक्त मनशक्ति केन्द्र, मुम्बई के सहयोग से तनाव प्रबंधन व गर्भ संस्कार पर कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें जनसमूह व विद्यालय परिवार ने भाग लेकर ज्ञानार्जन किया।

कृषिकर्म :- शारदा बालग्राम की कुल 15 से 25 एकड़ कृषि योग्य भूमि पर जीरोटिल फॉर्मिंग पद्धति से कृषि की जाती है जिससे एक बार जुताई पश्चात लगभग 20वर्षों तक बिना किसी जुताई के निर्बाध रूप से कृषि कार्य किया जा सकता है जिस कारण बार-बार जुताई में प्रयुक्त होने वाले ट्रेक्टर तथा मंहगे डीजल, उर्वरक, आदि साधनों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं रहती है। शारदा बालग्राम में इसी पद्धति से कृषिकर्म किया जा रहा है जिसके अंतर्गत वर्तमान में ऑर्गेनिक पद्धति से आलू, गोभी, बैंगन, मूली, मिर्ची, प्याज, लहसुन, टमाटर, गेंहू, जौ, सरसों, आदि फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। इसी प्रकार गाय के भोजन हेतु प्रयुक्त होने वाली बर्सिम, गिनी घास, नेपियर घास, आदि का उत्पादन भी किया जा रहा है। उक्त सभी कृषिकार्यों में बालग्राम में निवासरत बालकों का सहयोग प्राप्त किया जाता है तथा उन्हें कृषि से संबंधित नवीनतम पद्धति एवं तकनीकी का ज्ञान एवं कृषि कार्य करने हेतु प्रशिक्षित किया जाता है।

मशरूम उत्पादनः- शारदा बालग्राम में मशरूम उत्पादन की दिशा में एक नवीन पहल की गई है जिसके अंतर्गत अत्यन्त कम लागत से प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हुये मशरूम उत्पादन की तकनीक विकसित की जा रही है। इस प्रकार एक माह में लगभग 15किलोग्राम मशरूम का उत्पादन प्राप्त हो रहा है जो कि शारदा बालग्राम में निवासरत बालक/बालिकाओं को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन के रूप में प्रदाय किया जाता है। साथ ही बालकों को मशरूम उत्पादन की तकनीक से भी भली भांति परिचित कराया जा रहा है तथा मशरूम उत्पादन में वांछित सहयोग लिया जा रहा है जिससे उनके लिये भविष्य में स्व-रोजगार की दिशा विकसित हो सके।

राखाल गौशाला :- शारदा बालग्राम में राखाल गौशाला नाम से गौशाला स्थापित की गई है जिसमें सर्वोत्तम नस्ल की गुजरात की गिर प्रजाति की 03 गाय जिनके नाम गौरी, पार्वती एवं नर्मदा हैं एवं 01 शम्भू नामक नंदी बैल वर्तमान में निवासित हैं। उक्त गायों से प्राप्त दूध का वितरण बालग्राम में निवासरत बालक/बालिकाओं हेतु किया जाता है। भविष्य में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होने पर दही, घी, आदि दुग्ध से निर्मित पदार्थों को तैयार करने की कार्ययोजना विकसित की जा रही है जो बालकों को स्वावलंबी बनाने हेतु उपयोगी सिद्ध होगी।

पंचगव्य चिकित्सालय :- गौशाला के अंतर्गत ही पंचगव्य चिकित्सालय भी स्थापित किया गया है जिसमें प्रति सप्ताह के तीन दिवस पंचगव्य चिकित्सक द्वारा निःशुल्क परामर्श प्रदान किया जाता है तथा दूध, दही, छाछ, गोमूत्र, गोधन, आदि से पूर्णतः प्राकृतिक रूप से निर्मित औषधियां से विभिन्न प्रकार के रोगियों का उपचार किया जाता है।

जीवामृत :- शारदा बालग्राम स्थित गौशाला से प्राप्त गोधन, गोमूत्र, बेसन, गुड़, मृदा, आदि का प्रयोग करते हुये बालग्राम में ही लगभग 200लीटर के कन्टेनर में प्राकृतिक जीवामृत का उत्पादन सप्ताह किया जा रहा है। यह जीवामृत लगभग एक सप्ताह में पूर्ण रूपेण निर्मित हो जाता है जिसका प्रयोग कृषि भूमि में उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने की दृष्टि से किया जाता है। इसके उत्कृष्ट परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं। साथ ही बालकों को प्राकृतिक रूप से विकसित होने वाली कृषि पद्धति से परिचित होने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।

केंचुआ खादप्रकल्प :- शारदा बालग्राम में गौशाला के समीप ही केंचुआ खाद प्रकल्प विकसित किया गया है जिसमें केंचुआ से निर्मित खाद का प्रयोग कृषि हेतुकिया जा रहा है। इस प्रकार एक माह व 15 दिवस की अवधि में लगभग 80 किलोग्राम केंचुआ खाद तैयार हो जाती है जिसका प्रयोग कृषिकर्म एवं वृक्षों व पौधों को विकसित करने हेतु किया जा रहा है। इसके आशानुरूप परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बालकों को भी इस पद्धति से अवगत कराया जा रहा है।

मधुमक्खी पालन :- शारदा बालग्राम में मधुमक्खी पालन कर मधु निर्मित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है जिसके अंतर्गत प्रतिमाह लगभग 30लीटर मधु उत्पादन किये जाने की योजैना निर्मित की गई है। बालकों को मधु उत्पादन की पद्धति से अवगत कराया जावेगा जो कि उनके स्वावलंबन की दिशा में सहायक सिद्ध होगा।

दूषित जल उपचार संयंत्र :- शारदा बालग्राम में दूषित जल उपचार संयंत्र की स्थापना की गई है जिसमें आश्रम से उत्सर्जित दूषित जल को उच्च तकनीकी के माध्यम से संयंत्र में परिशोधन उपरांत स्वच्छ जल प्राप्त किया जाता है जो कि बालग्राम स्थित वृक्षों, पौधों, व कृषि कार्य में सिंचाई के तौर पर प्रयुक्त किया जाता है। इस प्रकार प्रतिदिन 10हजार लीटर जल इस पद्धति से प्राप्त किया जाता है।

गोबर गैस संयंत्र :- शारदा बालग्राम में स्वामी प्रेमानन्द भवन (रसोईघर) के समीप ही गोबर गैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है जिसमें गौशाला से उत्सर्जित होने वाले गोधन से गोबर गैस का निर्माण किया जाना संभव हो सकेगा जो कि आश्रम में ही भोजन पकाने हेतु प्रयोग की जा सकेगी। इस प्रकार प्राकृतिक रूप से निर्मित इंर्धन से भोजन निर्माण किया जावेगा।

आयुष केन्द्र :- शारदा बालग्राम परिसर में संचालित विद्यालय के निकट ही आयुष केन्द्र की स्थापना हेतु स्थान चिन्हित किया गया है जिसमें अतिशीघ्र भारत सरकार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुष केन्द्र स्थापित हो सकेगा जिसमें आश्रम के बालक/बालिकाओं व अंचल के निर्धन व जरूरतमंद व्यक्तियों को उपचार प्राप्त हो सकेगा।

टाटा क्लास एज की स्थापना :- शारदा बालग्राम में निवासित बालक/बालिकाओं को ऑनलाईन शिक्षा पद्धति से जोड़ने हेतु जनभागीदारी के आर्थिक सहयोग व टाटा क्लास एज, मुम्बई के तकनीकी सलाह व सहयोग से वर्चुअल क्लासरूम तैयार कराए गये हैं जिसमें नवीनतम एवं उच्च तकनीकी से शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस प्रकार शारदा बालग्राम स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व रामकृष्ण मिशन आश्रम स्थित सीबीएसई विद्यालय में वर्चुअल क्लासरूम की स्थापना की गई है जिससे विद्यार्थी अति उत्साह से ज्ञानार्जन कर रहे हैं।

श्री शिव व श्री हनुमान मंदिर :- शारदा बालग्राम परिसर में ही श्री शिव मंदिर व श्री हनुमान मंदिर की स्थापना की गई है जिसमें प्रतिदिन बालक/बालिका व आम जनमानस दर्शन व प्रार्थना सभा हेतु उपस्थित होते हैं। इस प्रकार बालक/बालिकाएं श्लोक व भजन आदि के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं ताकि उत्तम चरित्र व स्वस्थ मानसिक विकास हो सके।

वृक्षारोपण :- विगत वर्षों में वनस्पतिहीन इस पहाड़ी स्थान पर निरन्तर हजारों की संख्या में फलदार व औषधीय गुणों वाली इमारती वृक्षों का रोपण होता रहा है जिससे आज यह पहाड़ी वृक्षों से आच्छादित सघन वाटिका के रूप में पूर्णतः विकसित हो चुकीहै। वर्तमान में जनभागीदारी के सहयोग से अंचल के गणमान्यनागरिकों व समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से निरन्तर वृक्षारोपणकार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं जिससे शारदा बालग्राम एक आदर्श प्रदूषण मुक्त स्थान के रूप में पल्लवित हो रहा है।

बायोडायजेस्टर :- शारदा बालग्राम में ही बायोडाजेस्टर की स्थापना की जा रही है जिसके तहत बालग्राम से प्रतिदिन उत्सर्जित होने वाले दूषित जल व ठोस अपशिष्ट को बैक्टीरिया के माध्यम से उपचारित कर इसका प्रयोग कृषिकर्म में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा। इसके प्रयोग से कृषि उपार्जन में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकेंगे।

कृषक प्रशिक्षण केन्द्र :- कास्तकारों व कृषकों को कृषिकर्म में जैविक व प्राकृतिक रूप से नवीन पद्धतियों काप्रयोग कर कृषि उपार्जन करने तथा कृषिकर्म में नये आयाम स्थापित किये जाने के उद्देश्य से शारदा बालग्राम में कृषक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की जा रही है। इस हेतु स्थान व भवन चिन्हित किया जा चुका है तथा शीघ्र ही लगभग 150 कृषकों का प्रथम बैच इसमें प्रशिक्षण प्राप्त करेगा। इस प्रकार प्रत्येक पांच दिवसीय शिविर में भारतीय कृषकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा तथा प्रशिक्षण केन्द्र में उनके आवास व भोजन, इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित रहेगीं। इस प्रकार शारदा बालग्राम से प्रशिक्षण प्राप्त कर कृषकों द्वारा कृषि की नवीनतम प्राकृतिक व जैविक पद्धतियों का प्रयोग कर कृषि उपार्जन किया जावेगा जो कि भारतीय कृषि में नवीन आयाम स्थापित करेगा।

उपले (कण्डे) का निर्माण :- शारदा बालग्राम स्थित गौशाला से प्रतिदिन उत्सर्जित होने वाले गोधन का प्रयोग जैविक खाद, आदि निर्माण में तो किया ही जाता है, साथ ही साथ गोधन का प्रयोग उपले (कण्डे) के निर्माण में भी किया जाता है। इसका निर्माण बालग्राम के बालकों द्वारा ही नवीन तकनीक का प्रयोग करते हुये किया जाता है। निर्मित उपलों का रसोईघर में ईंधन के तौर पर प्रयोग होता है। साथ ही उपलों को विशेष तरीकों से निर्मित कर पैंकिंग किया जाता है तथा दैनिक हवन, पूजन में परिवारों द्वारा प्रयोग किया जाता है जिससे घर-परिवार का वातावरण रोगाणु-जीवाणु मुक्त होकर शुद्ध होता है तथा इसकी भारतीय परिवारों में काफी मांग है।

बधाई पत्रों (ग्रीटिंग) व सुसज्जित दीपकों (पेन्टेड दीये) का निर्माण :- शारदा बालग्राम के बालक/बालिकाओं को त्योहारों आदि अवसरों पर भारतीय परिवारों में प्रयुक्त होने वाले बधाई पत्रों (ग्रीटिंग कार्ड्स) निर्मित करने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसी के साथ भारतीय त्यौहारों में ही प्रयुक्त होने वाले सुसज्जित दीपकों को निर्मित करने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इन सामग्रियों का निर्माण बालग्राम के ही बालक/बालिकाओं द्वारा किया जाता है जिनको प्रदर्शन एवं बिक्री हेतु समय-समय पर दुर्गा पूजा व दीपावली आदि त्यौहारों पर समाजसेवी संस्थाओं व अन्य माध्यमों से प्रदर्शित किया जाता है जिसका बेहतर प्रतिसाद प्राप्त होता है तथा यह विघा बालक/बालिकाओं को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाये जाने में सहायक सिद्ध हो रही है।