• +91-7049855978, 7024266541      rkmasharadabalgram@gmail.com

Achievement


डॉ. विमला शुक्ला, विषेषज्ञ, वैकल्पिक चिकित्सा द्वारा शारदा बालग्राम में किया पीड़ितों का उपचार

डॉ. विमला शुक्ला, विषेषज्ञ, वैकल्पिक चिकित्सा तथा एक्यूप्रेषर एवं एक्यूपंक्चर, मुम्बई द्वारा शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर में दिनांक 01-06-2017 से दिनांक 07-06-2017 तक कैम्प लगाकर पीड़ितों का निःषुल्क उपचार किया गया।डॉ. विमला शुक्ला मुम्बई की निवासी हैं तथा ग्वालियर में पारिवारिक कार्य से अल्प प्रवास पर थीं। इस दौरान डॉ. विमला शुक्ला ने शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर के मुख्य कार्यपालक स्वामी सुप्रदीप्तानन्द जी के विषेष आग्रह पर अपनी सेवायें प्रदान की। वर्तमान में डॉ. विमला शुक्ला जी मुम्बई में वैकल्पिक चिकित्सा केन्द्र का संचालन करती हैं जहां प्रतिदिन कई पीड़ितों का एक्यूप्रेषर व एक्यूपंक्चर विधि से सफल उपचार किया जाता है।इस दौरानडॉ. विमला शुक्लाजी ने शारदा बालग्राम के गोकुल कुटीर में अस्थायी कैम्प लगाकर सांय 5बजे से 8बजे तक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से एक्यूप्रेषर एवं एक्यूपंक्चर तकनीक से जोड़ों के दर्द, घुटनों के दर्द, स्पाईन एवंरीढ़ की समस्या, सायटिका तथा पुराने जटिल रोगोसे पीड़ित रोगियों का उपचार किया। इस प्रकार एक सप्ताह तक आयोजित वैकल्पिक चिकित्सा षिविर में लगभग 50-60 पीड़ित स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर लाभान्वित हुये तथा डॉ. विमला शुक्लाजी के प्रति आभार प्रकट किया। डॉ. विमला शुक्ला जी ने भी भविष्य में पुनः ग्वालियर प्रवास होने पर इस प्रकार का षिविर आयोजित कर उपचार करने हेतु सहमति प्रदान की।

शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम उनके इस पुनीत कार्य पर आभार एवं कृतज्ञता प्रकट करता है तथा आषा करता है कि भविष्य मेंपुनःडॉ. विमला शुक्ला जी की सेवायें रामकृष्ण मिषन आश्रम के माध्यम से पीड़ितों को प्राप्त हो सके।

शिविर में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की प्रतिक्रिया एवं विवरण निम्नानुसार है :-

श्री विवके तोमर जी, प्रतिष्ठित समाज सेवी, ग्वालियर द्वारा अपने पांच वर्ष पुराने सायटिका रोग का उपचार कराया गया जिससे वह काफी लाभान्वित हुये।

श्री संजय भंसाली जी एवं श्री उदय भंसाली जी, उद्योगपति, ग्वालियर द्वारा पुराने जोड़ों के दर्द का सफल उपचार कराया गया जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ।

इसी प्रकार श्री नीरज सिन्हा जी, प्राचार्य, माउंट लिटेरा जी स्कूल के पिताजी श्री ए.के.सिन्हा, सेवा निवृत्त प्रबन्धक को पुराना घुटने का दर्द एवं पीठ दर्द में अकल्पनीय लाभ प्राप्त हुआ। साथ ही उनकी माता जी श्री मती सिन्हा को घुटने के दर्द एवं पैर के अंगूठे में सुन्नपन की समस्या थी जो कि उपचार उपरांत काफी लाभ प्राप्त हुआ है, इसी प्रकार श्री देवेन्द्र यादव जी, ठेकेदार, श्री दीपक बेदी जी, षिक्षक, श्री मालेष यादव जी, श्रमिक, श्री बेताली यादव जी, वाहन चालक, श्रीमती वर्षा बेदी, षिक्षक, श्रीमती प्रभावती यादव, वार्डन, आदि द्वारा काफी समय से प्रचलित कमर दर्द, घुटनों के दर्द, स्पाईन व रीढ़ से जुड़ी समस्याओं, पीठ दर्द, आदि का सफल उपचार प्राप्त किया तथा डाॅ. विमला शुक्ला जी द्वारा आयोजित षिविर के माध्यम से किये गये पुनीत कार्य के प्रति आभार व धन्यवाद व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में पुनः इस प्रकार के षिविर का शीघ्र आयोजन करने हेतु आग्रह किया।

शारदा बालग्राम में जीरो टिल फॉर्मिंग के माध्यम से फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन

जीरो टिल फॉर्मिंग :- शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर स्थित कृषि योग्य लगभग 14 बीघा में प्रयोग के तौर पर प्रारम्भ की गई नई तकनीक की एस.आर.टी. जीरो टिल फॉर्मिंग के अभूत पूर्व परिणाम प्राप्त हुये हैं। विगत एक वर्ष में माह जुलाई 2016 से अब तक अर्थात माह जून 2017 के मध्य विभिन्न जैविक खाद्य फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त हुआ है जिनका विवरण निम्नानुसार है:-

  • बैंगन :- विगत एक वर्ष में लगभग 9 क्विंटल बैंगन की फसल प्राप्त हुई है जो कि शारदा बालग्राम में आधा बीघा क्षेत्रफल में बोई र्गइ थी।
  • आलू :- इसी प्रकार विगत एक वर्ष की अवधि में आलू की फसल लगभग 2 बीघा क्षेत्रफल में बोवनी की गई थी जो कि 4 क्विंटल की बोवनी में लगभग 20 क्विंटल की पैदावार प्राप्त हुई है।
  • सरसों :- सरसों की फसल की बोवनी भी आधा बीघा क्षेत्रफल में की गई थी जो कि कुल बोवनी 5 किलो के विरूद्ध 20 से 25 किलोग्राम पैदावार प्राप्त र्हुइ है।
  • मूंग :- इसी प्रकार 5किलो मूंग की बोवनी आधा बीघा क्षेत्रफल में की गई थी जो कि रिकॉर्ड उत्पादन 40 किलोग्राम पैदावार प्राप्त हुई है तथा वर्तमान में भी फसल का उत्पादन जारी है।
  • हरीमिर्च :- आधा बीघा से भी कम क्षेत्रफल में बोई गई इस फसल का भी रिकॉर्ड उत्पादन 80 किलोग्राम विगत एक वर्ष में प्राप्त हुआ है।

इस प्रकार एस.आर.टी. जीरो टिल फॉर्मिंग के माध्यम से कम क्षेत्रफल में की गई बोवनी के विरूद्ध भी फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त हुआ है। इस हेतु एस.आर.टी. जीरो टिल फॉर्मिंग जिसमें 20वर्षों तक जुताई की आवष्यकता नहीं होती है, जैसी नई तकनीकी के साथ साथ अन्य घटकों का भी योगदान है जिस में जीवामृत प्रकल्प प्रमुख रूप से उल्लेखनीय है।

जीवामृतप्रकल्प :- शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर में ही कृषि की उन्नत पैदावार एवं प्राकृतिक दृष्टिकोण के अंतर्गत जीवामृत प्रकल्प तैयार किया जा रहा है। इस जीवामृत को तैयार करने की विधि के अंतर्गतसर्वप्रथम 200लीटर शुद्ध जल में 10लीटर गोमूत्र तथा 5 किलो गोधन के साथ एक किलोग्राम गुड़, दो किलोग्राम बेसन तथा एक किलोग्राम बांबी या मेड़ की मृदा का मिश्रण बनाया जाता है जिसे सात दिवस तक मिश्रित अवस्था में रखा जाता है तथा प्रातः एवं सांय एक बार मिश्रण को पुनः भली प्रकार मिश्रित किया जाता है। इस प्रकार सात दिवस की अवधि पष्चात यह जीवामृत तैयार हो जाता है जिसे फसलों की अच्छी पैदावार हेतु प्रयुक्त किया जाता है। यह एक प्रकार से प्राकृतिक खाद का कार्य करता है तथा फसलों की गुणवत्ता पूर्ण पैदावार में सहायक सिद्ध होता है। प्रयोग हेतु 15 लीटर पानी में 60 मिली लीटर जीवामृत को मिश्रित कर फसलों पर छिड़काव किया जाता है। इस प्रकार जीवामृत के प्रयोग से फसलों के उत्पादन में आष्चर्यजनक व रिकॉर्ड पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इस का प्रयोग शारदा बालग्राम में कृषि पैदावार में वृद्धि करने में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है। इस वर्ष लगभग 2000लीटर जीवामृत निर्मित किया गया है।

मशरूम उत्पादन :- शारदा बालग्राम में मशरूम उत्पादन की दिशा में एक नवीन पहल की गई है जिसके अंतर्गत अत्यन्त कम लागत से प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हुये मशरूम उत्पादन की तकनीक विकसित की जा रही है। इस प्रकार एक माह में लगभग 15 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन प्राप्त हो रहा है जो कि शारदा बालग्राम में निवासरत बालक/बालिकाओं को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन के रूप में प्रदाय किया जाता है। साथ ही बालकों को मशरूम उत्पादन की तकनीक से भी भली भांति परिचित कराया जा रहा है तथा मशरूम उत्पादन में वांछित सहयोग लिया जा रहा है जिससे उनके लिये भविष्य में स्व-रोजगार की दिशा विकसित हो सके।मषरूम उत्पादन की शुरूआत विगत वर्ष शीत ऋतु मं प्रारंभ की गई थी जो कि वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु के अंत तक 50किलोग्राम मषरूम उत्पादित किया जा चुका है तथा वर्तमान में भी निरन्तर उत्पादन जारी है। मषरूम उत्पादन के तहत मात्र 200ग्राम बीज के प्रयोग से एक माह में 10 किलोग्राम तक मषरूम का उत्पादन प्राप्त किया जाता है जिसका बाजार मूल्य रू.500प्रति किलोग्राम है। मषरूम बीज का प्रदाय श्री संजय कटारे जी के माध्यम से सहजता व सुलभता से प्राप्त हो जाता है। साथ ही उत्पादित मषरूम को सुखाकर विक्रय हेतु भी श्री संजय कटारे जी के माध्यम से विक्रय किया जाना संभावित है। इस प्रकार स्वरोजगार की दृष्टि से मषरूम उत्पादन एक लाभकारी प्रकल्प है। साथ ही उक्त प्रकल्प को गृह उद्योग के माध्यम से भी संचालित किया जा सकता है। उक्त कार्य में श्री संजय कटारे जी का पूर्ण सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। श्री संजय कटारे जी का सम्पर्क सूत्र मोबाईल नम्बर:- 9303099111 है।

प्राकृतिक शीत भंडारण :- शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर में अभी हाल ही में एक नवीन प्रकल्प प्रारंभ किया गया है। प्राकृतिक शीत भंडारण नामक प्रकल्प के अंतर्गत 100 वर्गफीट क्षेत्रफल में 4 फीट उंचाई का एक भंडारण कक्ष निर्मित कराया गया है जिसमें 6 सेन्टीमीटर के अन्तर से 4 ईंच मोटाई की दीवार निर्मित की गईं हैं। उक्त दोनों ही दीवारों के मध्य मोटी कंकड़ वाली बालू रेत का भराव किया गया है जिसमें बूंद/सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप इरीगिषेन) के माध्यम से जल का छिड़काव किया जाता है ताकि नमी की मात्रा बनी रहे। साथ ही उक्त कक्ष में सहजता से सामग्री के परिवहन हेतु सीढ़ियों का निर्माण भी किया गया है।

इस प्रकार उपरोक्त विधि से निर्मित प्राकृतिक/नैसर्गिक शीत भंडारण में लगभग 01 टन की मात्रा में खाद्य सामग्री का भंडारण सहजता से किया जा सकता है जो कि लगभग एक माह तक तरोताजा बना रह सकता है। उक्त भंडारण के भीतर तथा बाहर के तापमान में लगभग 15 से 20 डिग्री सेल्सियस का अंतर बना रहता है। इस प्रकार ग्रीष्म ऋतु में खाद्य सामग्री को तरोताजा बनाए रखने के उद्देष्य से प्राकृतिक शीत भंडारण अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उक्त भंडारण नाम मात्र की लागत में तैयार कराया जा सकता है। इच्छुक व्यक्ति शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, सचिन तेन्दुलकर मार्ग, सिटी सेन्टर, ग्वालियर में सायं 05 से 06 के मध्य उक्त प्रकल्प का अवलोकन कर सकते हैं।

केंचुआ खाद प्रकल्प :- शारदा बालग्राम में गौशाला के समीप ही केंचुआ खाद प्रकल्प विकसित किया गया है जिसमें केंचुआ से निर्मित खाद का प्रयोग कृषि हेतु किया जा रहा है। इस प्रकार एक माह व 15 दिवस की अवधि में लगभग 80 किलोग्राम केंचुआ खाद तैयार हो जाती है जिसका प्रयोग कृषिकर्म एवं वृक्षों व पौधों को विकसित करने हेतु किया जा रहा है। इसके आशानुरूप परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बालकों को भी इस पद्धति से अवगत कराया जा रहा है।

राखाल गौशाला :- शारदा बालग्राम में राखाल गौशाला नामसे गौशाला स्थापित की गई है जिसमें सर्वोत्तम नस्ल की गुजरात की गिर प्रजाति की 03 गाय जिनके नाम गौरी, पार्वती एवं नर्मदा हैं एवं 01 शम्भू नामक नंदी बैल वर्तमान में निवासित हैं। उक्त गायों से प्राप्त दूध का वितरण बालग्राम में निवासरत बालक/बालिकाओं हेतु किया जाता है। भविष्य में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होने पर दही, घी, आदि दुग्ध से निर्मित पदार्थों को तैयार करने की कार्ययोजना विकसित की जा रही है जो बालकों को स्वावलंबी बनाने हेतु उपयोगी सिद्ध होगी। 10 और गायो की बृध्दि हो गई।

आयुष केन्द्र :- शारदा बालग्राम परिसर में संचालित विद्यालय के निकट ही आयुष केन्द्र की स्थापना हेतु स्थान चिन्हित किया गया है जिसमें अतिशीघ्र भारत सरकार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुष केन्द्र स्थापित हो सकेगा जिसमें आश्रम के बालक/बालिकाओं व अंचल के निर्धन व जरूरतमंद व्यक्तियों को उपचार प्राप्त हो सकेगा।

वृक्षारोपण :- विगत वर्षों में वनस्पतिहीन इस पहाड़ी स्थान पर निरन्तर हजारों की संख्या में फलदार व औषधीय गुणों वाली इमारती वृक्षों का रोपण होता रहा है जिससे आज यह पहाड़ी वृक्षों से आच्छादित सघन वाटिका के रूप में पूर्णतः विकसित हो चुकीहै। वर्तमान में जन भागीदारी के सहयोग से अंचल के गणमान्य नागरिकों व समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से निरन्तर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं जिससे शारदा बालग्राम एक आदर्श प्रदूषण मुक्त स्थान के रूप में पल्लवित हो रहा है।

काष्तकार प्रशिक्षण शिविर :- भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तत्वाधान में शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर को काष्तकार प्रषिक्षण केन्द्र के रूप में चुना गया है। इसी क्रम में दिनांक 02-03-2017 से दिनांक 31-03-2017 तक की अवधि में कुल 150 काष्तकारो (किसानों) ने आवासीय प्रषिक्षण प्राप्त किया। उक्त शिविर में 30 काष्तकारों को समूहों में विभाजित कर कुल 05 दिवसीय प्रषिक्षण षिविर का आयोजन शारदा बालग्राम में किया गया जिस दौरान समस्त काष्तकारांे के आवास, भोजन-पानी, इत्यादि की उत्तम व्यवस्था शारदा बालग्राम में ही की गई।

प्रशिक्षण शिविर में शारदा बालग्राम के मुख्य कार्यपालक स्वामी सुप्रदीप्तानंद जी ने तथा विषेष आमंत्रित बाह्य कृषि विषेषज्ञों ने काष्तकारों को जीरोटिल फॉर्मिंग, मधुमक्खी पालन, वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना, मषरूम उत्पादन करने की विधि, ऑर्गेनिक खेती करने की विधि, कीटों एवं खरपतवारों से फसल की सुरक्षा करने के उपाय, आदि के विषय में विस्तृत व प्रायोगिक प्रषिक्षण प्रदान किया गया जिससे समस्त काष्तकार लाभान्वित हुये। प्रशिक्षण उपरांत समस्त काष्तकारों को उक्त सम्पूर्ण प्रायोगिक विधि की सी.डी. तैयार कर उपलब्ध कराई गई। प्रषिक्षण समापन पर माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी, केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, भारत सरकार ने समस्त काष्तकारों को प्रमाण-पत्र वितरित किये तथा इस प्रकार के प्रषिक्षण के आयोजन पर हर्ष एवं प्रसन्नता व्यक्त की तथा समस्त काष्तकारों से प्रषिक्षण अवधि में प्राप्त की गई कृषि की नवीनतम तकनीकों को व्यावहारिक तौर पर प्रयोग करने की अपेक्षा की। समस्त काष्तकारों ने इस प्रकार का अभूतपूर्व प्रषिक्षण प्राप्त करने पर स्वामी सुप्रदीप्तानंद जी तथा रामकृष्ण मिषन आश्रम को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा भविष्य में इसी प्रकार का प्रषिक्षण आयोजित करने हेतु अनुरोध किया।

बोर वैल :- शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर में कृषि कर्म की सुलभता हेतु एक बोर वैल का निर्माण कराया गया है तथा बोरिंग मषीन स्थापित की गई है। उक्त कार्य शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम के मुख्य कार्यपालक स्वामी सुप्रदीप्तानंद जी महाराज की प्रेरणा से ग्वालियर शहर के समाजसेवी जन द्वारा निःषुल्क कार्य कराया गया है।

अग्निहोत्र होम :- शारदा बालग्राम, रामकृष्ण मिषन आश्रम, ग्वालियर में प्रातःकाल सूर्योदय के समय तथा सांयकाल सूर्यास्त के समय में अग्निहोत्र होम प्रारंभ किया गया है जिसमें स्वामी सुप्रदीप्तानंद जी महाराज के साथ आश्रम में निवासरत समस्त बालक / बालिकाएं उक्त अग्निहोत्र होम में उपस्थित रहते हैं। इस विधि के अंतर्गत एक तांबे के पात्र में ढ़ाई गोधन (कण्डे) लेकर गाय के शुद्ध घृत मिलाकर प्रज्जवलित किया जाता है तथा सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय मंत्र जाप कर अग्निहोत्र होम किया जाता है। इस प्रकार की क्रिया से वातावरण शुद्ध व रोगमुक्त होता है। पष्चात में उक्त तांबे के पात्र में एक़ित्रत भस्मी को जल के साथ मिलाकर खेतों में छिड़काव कर दिया जाता है। इस क्रिया से खेती की पैदावार में भी लाभ होता है।